कोरोना वायरस से सुरक्षित हैं ये ब्लड ग्रुप वाले लोग

आज भारत में ही नहीं पूरी दुनिया में कोरोना वायरस फैला हुआ है इस महामारी से बचने के लिए सभी नाकाम कोशिशे की जा रही है लेकिन ये बीमारी रुकने का नाम नहीं ले रही है कुछ लोगों को ये बीमारी पूरी सरक्षा में रहने के बाद भी हो रही है और कुछ लोगों को ये बीमारी छू भी नहीं पा रही है ये सब आपकी बॉडी के सिम्टम्स के कारण ही हो रहा वैज्ञानिकों द्वारा लगाई गई जाँच से पता लगा है की ये वायरस कुछ खास DNA वाले लोगों को होने के बहुत ही कम चांस हैं

रेमडेसिविर काफी महंगी दवा है, इसे जेनेरिक दवा में क्यों नहीं शामिल किया जा रहा है? 
डॉ. अपर्णा अग्रवाल बताती हैं, ‘रेमडेसिविर नई दवा है। जब कोई भी नई दवा आती है तो उत्पादन कंपनी उसे पेटेंट करा कर बेचती है, तो ऐसी दवाइयां काफी महंगी मिलती हैं। हालांकि हमारे देश में यह दवा अभी बहुत ज्यादा महंगी नहीं है। सरकार इनपर नजर बनाए हुए है। सभी को यह समझना होगा कि यह दवा अभी मरीजों पर ट्रायल के रूप में दी जा रही है। ऐसा नहीं है कि रेमडेसिविर से सभी मरीज ठीक हो रहे हैं। इसके साथ अन्य दवाइयों पर भी ट्रायल चल रहा है।’

सीडीसी, अमेरिका के निदेशक ने कहा है कि वैक्सीन से भी ज्यादा प्रभावी मास्क है, क्या यह सच है? 
डॉ. अपर्णा अग्रवाल के मुताबिक, ‘अमेरिका के सीडीसी के निदेशक रॉबर्ट रेडफील्ड ने यह बात पूरी दुनिया में मास्क पर हुए बहुत सारे अध्ययनों के आधार पर कही है। अगर आमने-सामने बैठे हुए हैं और मास्क लगाए हैं और सुरक्षित दूरी बनाए हैं, तो सुरक्षा कई गुना बढ़ जाती है। लेकिन जरूरी है कि मास्क सही से लगाया हो, मुंह और नाक अच्छी तरह से ढका हुआ हो। वैक्सीन की बात करें तो उनपर कई ट्रायल चल रहे हैं। वायरस से बचाव के लिए एंटीबॉडी होते हैं, जो वैक्सीन देने के बाद करीब 70 फीसदी लोगों में ही बन पाते हैं, जबकि मास्क से 80-85 फीसदी तक सुरक्षा मिलती है।’

ऑस्ट्रेलिया के शोध में पाया गया है कि O+ वालों को कोरोना का खतरा कम होता है?  
दिल्ली के लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज की डॉ. अपर्णा अग्रवाल बताती हैं, ‘ऑस्ट्रेलिया में करीब 10 लाख लोगों के डीएनए पर शोध हुआ है। उन्होंने पाया कि O+ ब्लड ग्रुप वालों पर वायरस का असर कम होता है। इससे पहले हार्वर्ड से भी रिपोर्ट आई थी, लेकिन उसमें कहा गया था कि O+ वाले लोग कोरोना पॉजिटिव कम हैं, लेकिन गंभीरता और मृत्यु दर में बाकियों की तुलना में कोई फर्क नहीं है। अभी और देशों में हुए रिसर्च की रिपोर्ट आने पर ही कुछ कह सकते हैं। फिलहाल लोगों को इससे यह नहीं मानना है कि उन्हें संक्रमण नहीं होगा।’

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